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भोजपुर एनकाउंटर विवाद गहराया, मानवाधिकार अधिवक्ता ने NHRC में दायर की याचिका, जांच और मुआवजे की मांग

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भोजपुर के भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में मानवाधिकार आयोग में याचिका दाखिल की गई है। पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच, दोषियों पर कार्रवाई और परिवार को मुआवजे की मांग की गई है।

आरा/आलम की खबर:भोजपुर जिले का भरत तिवारी एनकाउंटर मामला अब राजनीतिक और सामाजिक बहस के साथ-साथ मानवाधिकार के स्तर पर भी पहुंच गया है। शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव निवासी भरत भूषण तिवारी की पुलिस कार्रवाई में हुई मौत को लेकर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। अब इस मामले में मानवाधिकार अधिवक्ता ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और राज्य मानवाधिकार आयोग में याचिका दाखिल कर निष्पक्ष जांच, दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई और पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा देने की मांग की है।

मुजफ्फरपुर के चर्चित मानवाधिकार अधिवक्ता एसके झा ने इस मामले को गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन का विषय बताते हुए आयोग का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि घटना की निष्पक्ष जांच जरूरी है, ताकि वास्तविक सच्चाई सामने आ सके और यदि किसी स्तर पर गलती हुई है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जा सके।

यह पूरा मामला भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव से जुड़ा हुआ है। यहां रहने वाले 28 वर्षीय भरत भूषण तिवारी की पुलिस कार्रवाई के दौरान मौत हो गई थी। घटना के बाद परिवार, ग्रामीणों और कई सामाजिक संगठनों की ओर से सवाल उठाए गए। वहीं पुलिस की ओर से घटना को जवाबी कार्रवाई बताया गया है।

भरत तिवारी मामले में बढ़ा विवाद

भरत तिवारी की मौत के बाद यह मामला तेजी से चर्चा में आया। परिवार और ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस कार्रवाई में कई सवालों के जवाब नहीं मिले हैं। उनका कहना है कि घटना की पूरी जांच निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए।

वहीं पुलिस का पक्ष है कि घटना के दौरान स्थिति तनावपूर्ण थी और पुलिस टीम पर खतरा उत्पन्न हुआ था, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई की गई। अब इस पूरे मामले की जांच के लिए सरकार की ओर से न्यायिक जांच की प्रक्रिया शुरू करने की बात सामने आई है।

मानवाधिकार आयोग में पहुंचा मामला

अधिवक्ता एसके झा की ओर से दाखिल याचिकाओं में मांग की गई है कि पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए। उन्होंने मांग की है कि घटना में शामिल पुलिसकर्मियों की भूमिका की जांच हो और यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।

याचिका में यह भी मांग की गई है कि जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी या रिटायर्ड न्यायाधीश की निगरानी में कराई जाए, ताकि पीड़ित पक्ष को न्याय मिलने का भरोसा कायम हो सके। इसके अलावा भरत तिवारी के परिवार को उचित आर्थिक सहायता देने की मांग भी की गई है।

घटना को लेकर परिवार के आरोप

परिवार और समर्थकों का आरोप है कि भरत ने घटना के दौरान आत्मसमर्पण करने की कोशिश की थी। उनका दावा है कि वीडियो में कुछ ऐसे तथ्य हैं जिनकी जांच जरूरी है। परिवार का कहना है कि अगर सरेंडर की स्थिति बनी थी तो फिर गोली चलाने की जरूरत क्यों पड़ी, इसकी जांच होनी चाहिए।

ग्रामीणों ने भी इस घटना को लेकर विरोध जताया था और निष्पक्ष जांच की मांग की थी। घटना के बाद इलाके में तनाव की स्थिति बनी और कई स्थानों पर प्रदर्शन भी हुए।

पुलिस का दावा और जांच की दिशा

पुलिस के अनुसार, 17 जून 2026 को सूचना मिली थी कि भरत तिवारी हथियार के साथ मौजूद है और फायरिंग कर रहा है। सूचना मिलने के बाद पुलिस और एसटीएफ की टीम मौके पर पहुंची थी।

पुलिस का दावा है कि मौके पर स्थिति बिगड़ गई और भरत की ओर से हथियार का इस्तेमाल किया गया, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई करनी पड़ी। कार्रवाई के दौरान वह घायल हुआ और इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। बाद में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

अब इस पूरे घटनाक्रम की जांच में पुलिस के दावे, परिवार के आरोप और सामने आए वीडियो समेत सभी पहलुओं को देखा जाएगा।

सरकार ने दिए न्यायिक जांच के निर्देश

मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की ओर से रिटायर्ड हाईकोर्ट जज से जांच कराने के निर्देश दिए जाने की जानकारी सामने आई है। सरकार की ओर से यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो सके।

इसके अलावा पुलिस विभाग की ओर से भी कार्रवाई की गई है। शाहपुर थाना क्षेत्र से जुड़े कुछ पुलिसकर्मियों को निलंबित किए जाने की जानकारी सामने आई है। वहीं मामले में अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज होने की बात भी सामने आई है।

प्रदर्शन और विरोध के बाद बढ़ा दबाव

भरत तिवारी की मौत के बाद भोजपुर सहित कई इलाकों में लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया। आरा-बक्सर मार्ग पर भी लोगों ने प्रदर्शन किया था। ग्रामीण और समर्थक लगातार निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।

विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रशासन को स्थिति नियंत्रित करने के लिए कदम उठाने पड़े। कई जगहों पर कैंडल मार्च और अन्य कार्यक्रमों के जरिए लोगों ने अपनी नाराजगी जाहिर की।

अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर

भरत तिवारी एनकाउंटर मामला अब कई स्तरों पर जांच के दायरे में है। एक तरफ मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज हो चुकी है, वहीं सरकार की ओर से न्यायिक जांच की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही गई है।

इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण यह होगा कि जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्य क्या कहते हैं। पुलिस की कार्रवाई सही थी या उसमें कोई चूक हुई, इसका फैसला जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।

फिलहाल भरत तिवारी एनकाउंटर मामला बिहार में कानून व्यवस्था, पुलिस कार्रवाई और मानवाधिकार से जुड़े बड़े मुद्दों में शामिल हो गया है।

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पुलिस कार्रवाई और मानवाधिकार के बीच संतुलन लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। किसी भी एनकाउंटर की निष्पक्ष जांच इसलिए जरूरी होती है ताकि पुलिस का मनोबल भी बना रहे और आम लोगों का भरोसा भी कायम रहे।

भरत तिवारी मामले में परिवार के आरोप और पुलिस के दावे दोनों सामने हैं। ऐसे मामलों में भावनाओं के बजाय निष्पक्ष जांच और कानून के अनुसार कार्रवाई ही सबसे उचित रास्ता है।

मानवाधिकार आयोग में मामला पहुंचने और न्यायिक जांच के निर्देश के बाद उम्मीद है कि पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने आएगी और यदि कोई दोषी होगा तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।

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